‘सरकार पर विश्वास कीजिए…’, यह अपील बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने विपक्ष के विधायकों से नहीं की। उन्होंने सरकार से तीखे सवाल पूछ रहे सत्ता पक्ष के विधायकों से यह बात कही।
इससे पहले भाजपा विधायक विशाल प्रशांत ने कहा, ‘जैसा मंत्री का जवाब आया है कि भूमिहार को भूमिहार-ब्राह्मण नहीं रखा जाएगा तो निवेदन है कि हमलोगों को ST में डाल दिया जाए। हम लोगों की जो स्थिति है उसकी जांच कराई जाए और ST में क्यों नहीं डाल दिया जा रहा है।’
20 जुलाई से 24 जुलाई तक 5 दिन चले मानसून सत्र के दौरान कई बार ऐसे मौके आए जब NDA के विधायकों ने ही सरकार को मुश्किल में डाल दिया। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव सदन नहीं आए। उनकी गैरमौजूदगी में सत्ता पक्ष के विधायकों ने ही कई बार विपक्ष का रोल निभाया। भाजपा विधायक विनय बिहारी ने चीनी मिलों की जमीन बेचने पर सवाल किए।
1: ‘भूमिहार ब्राह्मण’ नहीं भूमिहार
भाजपा विधायक जीवेश मिश्रा ने सदन में सरकारी दस्तावेजों और जाति प्रमाण पत्रों में ‘भूमिहार’ की जगह ‘भूमिहार ब्राह्मण’ दर्ज करने की मांग उठाई। उन्होंने 1931 की जनगणना, पुराने गजट और राजस्व रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि आधिकारिक दस्तावेजों में एकरूपता लाई जानी चाहिए।
जवाब में उप मुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने मांग खारिज करते हुए कहा कि नियमों में ‘भूमिहार ब्राह्मण’ नाम दर्ज करने का कोई प्रावधान नहीं है। सवर्ण आयोग ने भी नाम बदलने की अनुशंसा नहीं की है। सरकार ने साफ किया कि आधिकारिक रिकॉर्ड में केवल ‘भूमिहार’ लिखा जाएगा।
सरकार के इस जवाब से भाजपा विधायक संतुष्ट नहीं दिखे। जीवेश मिश्रा के समर्थन में एनडीए के कई विधायक खड़े हो गए और सदन में तीखी बहस हुई।
इसी दौरान भाजपा विधायक विशाल प्रशांत ने कहा कि यदि सरकार ‘भूमिहार ब्राह्मण’ को मान्यता नहीं देती तो समुदाय की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उसे एसटी सूची में शामिल करने पर विचार किया जाए।
2: आरक्षण पर अपनी ही सरकार को जदयू विधायक ने घेरा
बिहार विधानसभा के अंदर आरक्षण के मुद्दे पर धोरैया से जदयू विधायक मनीष कुमार ने सरकारी नियुक्तियों में अनुसूचित जाति (एससी) के लिए 16% आरक्षण का पालन नहीं होने का मुद्दा उठाया।
आरोप लगाया कि कई भर्ती विज्ञापनों में एससी के लिए शून्य या बेहद कम पद रखे गए हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि प्रवर्तन अवर निरीक्षक के 33 और योजना सहायक के 88 पदों में एससी के लिए एक भी सीट नहीं है।
इसके जवाब में उप मुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि एससी के लिए 16% आरक्षण और प्रमोशन का प्रावधान लागू है। जवाब से असंतुष्ट मनीष कुमार ने कार्यकारी व्यवस्था नियमावली-2023 का हवाला देते हुए कहा कि एससी-एसटी के 76,595 पद फ्रीज हैं और सरकार से पूछा कि इन्हें आखिर कब भरा जाएगा।
3: शनिवार को स्कूलों में हाफ डे
सरकारी स्कूलों में शनिवार को क्लासेज फिर से हाफ-डे चलाने पर सत्ताधारी एमएलसी और मंत्री आमने सामने दिखे। भाजपा विधान पार्षद नवल किशोर यादव और जीवन कुमार ने अल्पसूचित प्रश्न के दौरान यह मुद्दा उठाया।
जदयू के नीरज कुमार और डॉ संजीव कुमार सिंह ने इसका समर्थन किया। सदस्यों ने कहा कि नई शिक्षा नीति में दो शनिवार को छुट्टी और दो शनिवार को दो ढाई घंटे ही स्कूल चलाने का प्रावधान है।
विधान परिषद में शुक्रवार को विधान पार्षदों की मांग पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि सदस्यों की चिंता देखते हुए शनिवार को हाफ-डे किए जाने पर एक सप्ताह में बैठकर निर्णय ले लिया जाएगा। शिक्षक और छात्रों दोनों को लाभ मिल सके, ऐसा काम सरकार करेगी।
बच्चों की पढ़ाई से जुड़े एक अन्य मामले को उठाते हुए जदयू विधायक श्याम रजक ने अपनी सरकार से सवाल किए। मंत्री लखेंद्र कुमार के जवाब पर असंतोष जताते हुए उन्होंने कहा, ‘डॉ. भीमराव अंबेडकर स्कूलों को बनाते समय उद्देश्य था कि गरीब बच्चों को शिक्षा से जोड़ा जाए, लेकिन अभी तक 62% शिक्षकों के पद खाली हैं।’
‘जब 62% शिक्षक नहीं हैं तो उन बच्चों की पढ़ाई का क्या होगा। ये कह रहे हैं कि BPSC को अधियाचना की जा रही है। अधियाचना ही होती रहेगी तो बच्चे कैसे पढ़ेंगे?’
श्याम रजक के सवाल पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि अंबेडकर आवासीय विद्यालयों में रिक्त पदों पर एक महीने में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित कर दी जाएगी।
4: सोलर लाइट योजना पर आमने-सामने
सोलर स्ट्रीट लाइट योजना पर सत्ता पक्ष के विधायक सरकार के लिए असहज सवाल लेकर खड़े थे। जदयू विधायक श्याम रजक ने दावा किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में 70 फीसदी सोलर लाइट बंद हैं।
इसका समर्थन भाजपा विधायक जीवेश मिश्रा और जदयू विधायक अजीत कुमार ने किया। इन्होंने पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के जवाब पर आपत्ति जताते हुए अपने-अपने क्षेत्र में चलकर जमीनी हकीकत देखने की चुनौती दी।
मंत्री ने कहा कि राज्य में अभी 57% लाइटें लगी हैं। खराब लाइटों की मरम्मत लगातार कराई जा रही है। ठेकेदारों के भुगतान का 30% हिस्सा पांच साल तक पंचायतों के पास सुरक्षित रखा जाता है ताकि जरूरत पड़ने पर मरम्मत कराई जा सके। बहस के दौरान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने का सुझाव दिया।
5: घरों के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन तारों पर भाजपा विधायक ने किया सवाल
भाजपा विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने ग्रामीण इलाकों में गरीबों और दलित बस्तियों के घरों के ऊपर से गुजर रहे 11 हजार वोल्ट के हाईटेंशन तारों का मुद्दा उठाकर अपनी ही सरकार को घेरा।
उन्होंने कहा कि इससे हर समय बड़े हादसे का खतरा बना रहता है। तार हटाने के लिए सुपरविजन और एस्टीमेट शुल्क लेकर गरीबों के साथ अन्याय किया जा रहा है।
ऊर्जा विभाग ने जवाब दिया कि मौजूदा नियमों के तहत आवेदन और निर्धारित शुल्क जमा होने के बाद ही तार हटाने की प्रक्रिया शुरू होती है। यह भी स्पष्ट किया कि तकनीकी रूप से संभव होने पर ही हाईटेंशन लाइनें हटाई जा सकती हैं। विधायक ने सरकार के इस जवाब पर असंतोष जताते हुए नियमों में बदलाव की मांग की।
6: पुल निर्माण में दो साल की देरी
जदयू विधायक डॉ. जितेंद्र कुमार ने नालंदा के अस्थावां विधानसभा क्षेत्र स्थित तरौनी गांव में मुंशी नदी पर प्रस्तावित पुल निर्माण में दो साल की देरी का मुद्दा उठाकर सरकार को घेरा।
उन्होंने कहा कि प्रशासनिक स्वीकृति और टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ। ग्रामीणों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
विधायक ने ठेकेदार तय होने के बाद भी काम शुरू नहीं होने पर ग्रामीण कार्य विभाग और इंजीनियरों की कार्यशैली पर सवाल उठाए। देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
7: विनय बिहारी बोले- जनता को चीनी मिल चाहिए
भाजपा विधायक विनय बिहारी ने बंद पड़ी चीनी मिलों को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, ‘न नदी, न पहाड़ और न ही झील चाहिए, बिहार की जनता को चीनी मिल चाहिए। औद्योगिक विकास की गति न जाने कौन सी जगह टिक गई, मोतिहारी मिल चली नहीं, पर किसानों की जमीन बिक गई।’
विनय बिहारी ने कहा कि पश्चिम चंपारण समेत राज्य के कई इलाकों में चीनी मिलें बंद हैं। हजारों लोगों की आजीविका प्रभावित हो रही है। सरकार पर्यटन के बजाय उद्योगों को प्राथमिकता दे। बंद मिलों को चालू कराए। उन्होंने सवाल किया कि चीनी मिलों की जमीनें क्यों बेची गईं।
8: चीनी मिल के पास किसानों का करोड़ों रुपए बकाया
जदयू विधायक मंजीत सिंह ने गोपालगंज के सासामुसा चीनी मिल का मुद्दा उठाते हुए उद्योग विभाग पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि मिल बंद होने से किसान और गरीब कर्मचारी लंबे समय से आर्थिक संकट झेल रहे हैं। उनके करोड़ों रुपए का बकाया अब तक नहीं मिला है।
विधायक ने आरोप लगाया कि वर्षों से लंबित इस मामले पर सरकार की ओर से ठोस पहल नहीं की गई है। उन्होंने उद्योग विभाग से बकाया भुगतान और बंद मिल को लेकर सरकार की नीति स्पष्ट करने की मांग की।
9: जर्जर स्कूलों पर सीएम को देना पड़ा जवाब
मुजफ्फरपुर के गायघाट सीट से जदयू विधायक कोमल सिंह ने सरकारी स्कूलों की बदहाली का मुद्दा उठाया। कहा, ‘कई स्कूलों के भवन जर्जर होकर गिर चुके हैं। कुछ जगहों पर दो कमरों में 500 से 600 बच्चों की पढ़ाई कराई जा रही है।’
मामले पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आश्वासन दिया कि अगले छह महीने में स्कूलों की स्थिति में सुधार दिखेगा। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बताया कि प्राथमिक विद्यालयों में तय मानक से करीब 63 हजार अधिक शिक्षक कार्यरत हैं।
10: ग्रामीण सड़कों के निर्माण पर घिरी सरकार
बिहार विधानसभा में ग्रामीण सड़कों और पुलों के निर्माण में देरी का मुद्दा उठा। ग्रामीण कार्य मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि शिलान्यास के बाद जिन योजनाओं की निविदाएं रद्द हो चुकी हैं, उन्हें दोबारा टेंडर निकालकर पूरा कराया जाएगा।
मंत्री ने बताया कि अब ग्रामीण सड़कों के लिए छोटे पैकेज में निविदाएं जारी की जा रही हैं। एक पैकेज की सीमा 50 करोड़ रुपए तक रखी गई है, जिससे स्थानीय ठेकेदारों को काम मिलने में आसानी होगी।
विधायकों ने बड़े पैकेज में शुरू हुई कई योजनाओं के वर्षों तक अधूरे रहने पर सवाल उठाए थे। मंत्री ने कहा कि काम में लापरवाही करने वाले ठेकेदारों और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जा रही है। राज्य में ग्रामीण सड़क निर्माण पर अब तक 1.17 लाख करोड़ रुपए से अधिक खर्च हुए हैं, जिससे 1.20 लाख किलोमीटर से ज्यादा सड़कें और 32 हजार से अधिक पुल बनाए गए हैं।
सड़क-पुल के मुद्दे पर सवाल उठाने वाले भाजपा विधायक
- प्रमोद कुमार- मोतिहारी विधानसभा क्षेत्र से विधायक है। बिहार सरकार में पूर्व गन्ना उद्योग एवं विधि मंत्री रह चुके हैं।
- सचिंद्र प्रसाद सिंह– पूर्वी चंपारण के कल्याणपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं।
- देवेश कांत सिंह- सीवान के गोरियाकोठी विधानसभा क्षेत्र से विधायक।
- डॉ. अरुण कुमार सिंह– मुजफ्फरपुर के बरूराज विधानसभा क्षेत्र से विधायक।
मानसून सत्र में किए गए 1,038 सवाल
बिहार विधानमंडल के मानसून सत्र के दौरान विधायकों ने 1,038 सवाल पूछे। इनमें से 971 प्रश्न स्वीकृत किए गए। स्वीकृत सवालों में 74 अल्पसूचित प्रश्न थे, जिनमें से विभागों ने 70 के जवाब दिए।
- 721 तारांकित प्रश्नों में से 697 के जवाब सदन को मिले। इसके अलावा 176 अतारांकित प्रश्न भी स्वीकृत हुए। हालांकि, विधायकों के 24 सवालों का जवाब नहीं मिल सका। इन सवालों के जवाब देने में संबंधित विभागों की सुस्ती सामने आई।
- मानसून सत्र में विधायकों ने शिक्षा, गृह, कृषि, पंचायती राज, ग्रामीण विकास और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े मुद्दे ज्यादा उठाए।
- शिक्षकों के ट्रांसफर-पोस्टिंग, ग्रामीण स्कूलों में शिक्षकों की कमी, इंजीनियरिंग कॉलेजों और पॉलिटेक्निक संस्थानों में खाली पड़े पदों तथा NEET-UG पेपर लीक मामले को लेकर सरकार से जवाब मांगा गया।
- राज्य में बढ़ते अपराध और NEET पेपर लीक के विरोध में छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार को घेरा गया।
- किसानों को समय पर यूरिया-खाद नहीं मिलने, सूखे की स्थिति और खेतों की मिट्टी जांच के लिए लैब व्यवस्था को लेकर सवाल उठे।
- होल्डिंग टैक्स वसूली की नई नियमावली और बिहार नगर विकास विधेयक के प्रावधानों को लेकर विधायकों ने सरकार की नीति पर सवाल खड़े किए।
- दियारा क्षेत्रों में पीपा पुल, ग्रामीण सड़कों की खराब स्थिति और विभागीय कामकाज को लेकर सदन में लंबी चर्चा हुई।
- सरकारी अस्पतालों की सुविधाओं, डॉक्टरों की बहाली और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े संशोधन विधेयकों को लेकर विधायकों ने सरकार से जवाब मांगा।
मानसून सत्र में 21 विधेयक-अनुपूरक बजट को मंजूरी
मानसून सत्र में वर्ष 2026-27 के प्रथम अनुपूरक बजट को मंजूरी दी गई। राज्य सरकार ने 87 हजार करोड़ रुपए का पहला सप्लीमेंट्री बजट पारित कराया। विभिन्न विभागों से जुड़े 21 राजकीय विधेयक पास कराए गए।
जनहित के मुद्दों को लेकर सदस्यों ने 206 ध्यानाकर्षण सूचनाएं दीं। इनमें 8 पर सदन में वक्तव्य हुआ, जबकि 180 को लिखित जवाब के लिए विभागों को भेजा गया।
इसके अलावा 193 निवेदन और 119 याचिकाएं भी सदन में आईं। 100 गैर-सरकारी संकल्पों पर चर्चा हुई।
CAG की रिपोर्ट सदन में पेश
23 जुलाई को नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की विभिन्न रिपोर्टें सदन में रखी गईं। इन्हें विचार के लिए बिहार विधानसभा की लोक लेखा समिति के पास भेजा गया है।







