बांकीपुर की जंग की चिंता अब नीतीश कुमार को भी सताने लगी है। उन्होंने अपने सीनियर नेताओं को बुला लिया। दरअसल, बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में प्रचार लिए आखिरी 48 घंटे में सभी पार्टियां अपनी गोटियां सेट करने में लगी है। प्रशांत किशोर ने इन बड़ी पार्टियों की चैन चुरा ली है।
जदयू की चुनावी रणनीति और पार्टी की दिलचस्पी को लेकर बन रहे माहौल के बीच नीतीश कुमार ने खुद कमान संभाली। उन्होंने अपने आवास पर वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों की आपात बैठक बुलाकर जमीनी स्थिति का जायजा लिया। बैठक में संगठन की सक्रियता, जनसंपर्क अभियानों और मतदाताओं के रुझान पर विस्तार से चर्चा हुई। नीतीश कुमार ने नेताओं को निर्देश दिया कि वे अंतिम समय तक पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ प्रचार में जुटे रहें, ताकि सरकार के विकास कार्यों का संदेश हर घर तक पहुंचे।
बांकीपुर को लेकर नीतीश का ‘फाइनल कॉल’
बैठक के दौरान नीतीश कुमार ने नेताओं से कहा कि चुनाव प्रचार समाप्त होने से लेकर ईवीएम सील होने तक किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए। उन्होंने एनडीए सरकार की ओर से चलाए जा रहे सामाजिक न्याय और जनकल्याण के संकल्पों को प्रत्येक मतदाता तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंपी। बांकीपुर में 30 जुलाई को वोटिंग है।
जेडीयू नेताओं को मिला नीतीश से टिप्स
- चुनाव प्रचार के अंतिम क्षण तक पूरी मजबूती, समर्पण और संगठन क्षमता के साथ कार्य करने का निर्देश।
- नेताओं ने बैठक में दावा किया कि एनडीए प्रत्याशी नीरज कुमार सिन्हा को जनता का भारी समर्थन मिल रहा है।
- बैठक में कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा, उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी, मंत्री अशोक चौधरी, श्रवण कुमार, जमा खां, सुनील कुमार, ललन सर्राफ, अरुण मांझी और इरशाद अली आजाद मौजूद रहे।
बांकीपुर के दो दशकों के विकास का दावा
संजय झा ने कहा कि बांकीपुर की जनता ये भली-भांति समझती है कि यह चुनाव सिर्फ विधायक चुनने का नहीं, बल्कि विकास की रफ्तार बनाए रखने का है। पिछले दो दशकों में नीतीश कुमार के कार्यकाल के दौरान पटना में जो विकास कार्य हुए हैं, वे ऐतिहासिक हैं। सिपारा में आयोजित एनडीए की संयुक्त जनसभा में संजय झा ने प्रशांत किशोर पर तंज कसते हुए कहा कि वे अपना कहा भूल जाते हैं। पीके ने दावा किया था कि जदयू को 25 से अधिक सीटें मिलने पर वे राजनीति छोड़ देंगे। जनसभा में स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार और ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि चुनाव विकसित बिहार और सुशासन बनाम भ्रम फैलाने वालों के बीच है।







