नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक तथा धांधली के मामलों को लेकर पटना हाईकोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। हाईकोर्ट ने राज्य के तीन जिलों पटना, पूर्णिया और लखीसराय में विशेष ‘फास्ट ट्रैक कोर्ट’ (त्वरित अदालत) का गठन किया है। दूसरी तरफ, नीट प्रकरण के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने के राज्य सरकार के फैसले के बाद महाधिवक्ता एसडी संजय ने कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए हैं। पटना सिविल कोर्ट ने अर्जी स्वीकार करते हुए जेल में बंद प्रदर्शनकारी छात्रों को रिहा करने का आदेश भी दे दिया है, जिससे अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है।
छात्रों पर दर्ज 64 मुकदमे वापस लेने की प्रक्रिया शुरू
बिहार सरकार के फैसले को देखते हुए महाधिवक्ता ने संबंधित जिलों के डीएम और अभियोजन पदाधिकारियों को पत्र भेजकर 26 जुलाई 2026 की शाम 6 बजे से पहले दर्ज सभी केस वापस लेने का निर्देश दिया है। प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कुल 64 मामले दर्ज किए गए हैं, जिन्हें वापस लिया जा रहा है।
तीन जिलों में गठित हुई फास्ट ट्रैक कोर्ट
- कानूनी प्रावधान: ये अदालतें ‘द पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मींस) एक्ट, 2024’ के तहत मामलों की सुनवाई करेंगी।
- पटना विशेष कोर्ट: गौरव सिंह को पटना स्थित फास्ट ट्रैक कोर्ट का पीठासीन पदाधिकारी बनाया गया है।
- लखीसराय विशेष कोर्ट: सीमा भरतिया को लखीसराय विशेष अदालत में नियुक्त किया गया है।
- पूर्णिया विशेष कोर्ट: ठाकुर अमन कुमार पूर्णिया में पीठासीन पदाधिकारी का पद संभालेंगे।
- सरकारी प्रक्रिया: हाईकोर्ट प्रशासन ने इन विशेष कोर्ट की अधिसूचना जारी करने के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेज दिया है।
रोजाना सुनवाई, 3 महीने तक ट्रायल
फास्ट ट्रैक कोर्ट का मुख्य उद्देश्य मामलों का अविलंब निपटारा करना है। अदालत में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल होने के दिन से ही प्रतिदिन (डे-टू-डे) सुनवाई शुरू की जाएगी। हाईकोर्ट के निर्देशानुसार, इन विशेष अदालतों को तीन महीने के भीतर ट्रायल की प्रक्रिया पूरी कर अपना फैसला सुनाना होगा।
चार थानों में दर्ज 27 केस वापसी को अदालत में लगाई अर्जी
नीट पेपर लीक के खिलाफ और तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान पटना में दर्ज मुकदमों की वापसी की प्रक्रिया बुधवार को पूरी होने की संभावना है। महाधिवक्ता एसडी संजय की ओर से पत्र जारी किये जाने के तुरंत बाद पटना के डीएम और जिला अभियोजन पदाधिकारी ने इस संबंध में कार्रवाई शुरू कर दी। आंदोलन के दौरान दो दिनों में दर्ज कुल 27 मुकदमे पटना की चार अदालतों से जुड़े हैं। इनमें से कुछ केस आम लोगों द्वारा भी दर्ज कराए गए हैं।







