बिहार की सम्राट चौधरी सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को फटकार लगाई. दरअसल, मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में दरभंगा में स्थित 800 से 900 साल पुरानी 3 ऐतिहासिक झीलों के सुंदरीकरण परियोजना के मामले की सुनवाई हुई. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि सुंदरीकरण के नाम पर जलाशयों को नहीं भरा जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बिना अदालत की अनुमति के इन जल निकायों को हाथ भी मत लगाइए. इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने तीनों झीलों पर चल रहे निर्माण कार्य को तत्काल प्रभाव से रोकने का आदेश दिया.
तीनों झीलों की परियोजना पर लगाई रोक
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने ‘गंगासागर, दिग्घी और हराही झील’ के सुंदरीकरण एवं पुनर्जीवन परियोजना की सुनवाई की. वहीं बिहार सरकार ने अदालत से कहा कि यह 100 करोड़ से अधिक की महत्वाकांक्षी परियोजना है.
- बिहार सरकार ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य झीलों का संरक्षण और विकास करना है. हालांकि, शीर्ष अदालत ने बिहार सरकार की इस दलील को स्वीकार नहीं किया. अदालत ने कहा कि जब तक अदालत की अनुमति नहीं मिलती, तब तक किसी भी तरह का निर्माण कार्य नहीं किया जाएगा.
जलाशयों को भरना स्वीकार्य नहीं- सुप्रीम कोर्ट
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से कहा, “सुंदरीकरण की आड़ में जलाशयों को भरने की अनुमति नहीं दी जा सकती. अपने अधिकारियों को निर्देश दें कि वे इन तालाबों को हाथ न लगाएं.” इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि झीलों का क्षेत्रफल किसी भी तरह कम नहीं होना चाहिए.
याचिकाकर्ताओं ने उठाया था पर्यावरण संरक्षण का मुद्दा
बता दें कि इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण का मुद्दा उठाया था. ‘तालाब बचाओ अभियान’ की ओर से कोर्ट में पेश हुए अधिवक्ता रेणु प्रजापति ने बताया ये तीनों जलाशय संरक्षित वेटलैंड्स की सूची में शामिल हैं.
- इनके किनारों पर निर्माण कार्य करना पर्यावरणीय नियमों और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों का उल्लंघन है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने अपने हलफनामे में स्वीकार किया है कि परियोजना के तहत करीब चार एकड़ क्षेत्र में मिट्टी भरने का प्रस्ताव है.
बिहार सरकार ने कोर्ट में क्या दी सफाई?
वहीं बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि झीलों को मनमाने तरीके से नहीं भरा जा रहा. सरकार के अनुसार, सिर्फ कटाव रोकने और तटबंधों को मजबूत करने के लिए सीमित स्तर पर मिट्टी भरने और स्टोन पिचिंग का काम किया जा रहा है.
- इसके साथ ही सरकार ने दावा किया है कि यह कार्य राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के निर्देशों के अनुरूप है. बिहार सरकार ने कहा कि इस परियोजना के तहत 11 स्नान घाट, 5 चेंजिंग रूम और 7 शौचालय बनाए जाने की योजना है, जिससे लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें और झीलों को कचरा व प्रदूषण से बचाया जा सके.
बिहार की ऐतिहासिक धरोहर मानी जाती हैं ये झीलें
बता दें कि गंगासागर, दिग्घी और हराही झीलें दरभंगा शहर की ऐतिहासिक पहचान मानी जाती हैं. इनकी उम्र करीब 800 से 900 वर्ष बताई जाती है. बता दें कि पर्यावरणविदों, शिक्षाविदों और स्थानीय नागरिकों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मांग की है कि इन जलाशयों को उनके मूल स्वरूप में संरक्षित किया जाए.
- साथ ही इन पर किसी भी तरह के अतिक्रमण या भराई पर रोक लगाई जाए. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इन तीनों झीलों पर चल रहे निर्माण कार्य पर रोक लगा दी गई है. अब सुप्रीम कोर्ट अगली सुनवाई के दौरान बिहार सरकार से विस्तृत जवाब और परियोजना की प्रगति पर रिपोर्ट मांगेगा.







