बिहार सरकार ने विधायकों और सांसदों के सम्मान की रक्षा को लेकर अधिकारियों को प्रोटोकॉल का सख्ती के पालन का आदेश दिया है। इसके तहत यदि कोई अफसर विधायक और सांसद का फोन कॉल किसी कारण से नहीं कर पाते हैं, तो उन्हें कॉल बैक करना होगा। राज्य सरकार की ओर से अधिकारियों को विधायकों के फोन का तत्काल जवाब देने, पत्राचार की सूचना देने और उनके कार्यालय आने पर सम्मानजनक व्यवहार करने का निर्देश दिया गया।
सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से लिखा गया पत्र
अफसरों के प्रोटोकॉल को लेकर सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी आदेश में अधिकारियों से कहा गया है कि जनप्रतिनिधियों के पद और सम्मान का पूरा ध्यान रखा जाए। इसे लेकर सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव मोहम्मद सोहैल ने सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव सचिव, पुलिस महानिदेशक, सभी प्रमंडलीय आयुक्त और जिलाधिकारियों को पत्र लिखा है।
विधायकों के फोन का जल्द देना होगा जवाब
सरकार ने निर्देश दिया है कि बिहार विधानसभा के सदस्यों की ओर से किए गए दुर्भाष कॉल (फोन कॉल) का यथासंभव तुरंत जवाब दिया जाए।
अगर किसी अपरिहार्य कारण से अधिकारी उस समय फोन नहीं उठा पाते हैं, तो बाद में संबंधित विधायक या जनप्रतिनिधि को फोन कर आवश्यक संवाद स्थापित करना होगा। यानी अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों के फोन को नजरअंदाज नहीं करने की हिदायत दी गई है।
विधायकों के पत्र मिलने की सूचना भी देनी होगी
सरकार ने जनप्रतिनिधियों से प्राप्त पत्राचार को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं। विधायक या अन्य जनप्रतिनिधि की ओर से भेजे गए पत्र की प्राप्ति की सूचना तत्काल उपलब्ध कराने को कहा गया है।
इसके साथ ही पत्र में उठाए गए मुद्दे पर की गई कार्रवाई या मामले की वर्तमान स्थिति की जानकारी भी संबंधित जनप्रतिनिधि को निर्धारित समय-सीमा के भीतर उपलब्ध करानी होगी।
इसका मतलब है कि किसी विधायक के पत्र को कार्यालय में लंबित रखकर छोड़ देने के बजाय उस पर कार्रवाई और उसकी स्थिति की जानकारी देना जरूरी होगा।
मुलाकात के दौरान प्रोटोकॉल और सम्मान का ध्यान रखना होगा
सरकार ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि जब कोई जनप्रतिनिधि किसी अधिकारी के कार्यालय में मुलाकात के लिए आए, तो उनके पद और गरिमा के अनुरूप अपेक्षित प्रोटोकॉल, शिष्टाचार और सम्मानजनक व्यवहार का पालन किया जाए।
यानी सांसद या विधायक के कार्यालय पहुंचने पर उनके साथ निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार व्यवहार करना होगा और उनकी गरिमा का ध्यान रखना होगा।
पहले भी जारी होते रहे हैं ऐसे निर्देश
सामान्य प्रशासन विभाग ने अपने पत्र में बताया है कि इस तरह के निर्देश पहले भी समय-समय पर जारी किए जाते रहे हैं। विभाग ने 2012, 2017, 2018, 2021 समेत अलग-अलग समय पर जारी किए गए पत्रों का उल्लेख किया है। इसके अलावा संसदीय कार्य विभाग की ओर से भी फरवरी 2021 में संबंधित विषय पर निर्देश जारी किए गए थे। अब सरकार ने एक बार फिर इन निर्देशों को दोहराते हुए अधिकारियों और कर्मचारियों से इसका प्रभावी तरीके से पालन कराने को कहा है।
अधीनस्थ कार्यालयों में भी लागू होंगे निर्देश
सरकार ने केवल वरिष्ठ अधिकारियों तक ही इन निर्देशों को सीमित नहीं रखा है। पत्र में कहा गया है कि अपने अधीनस्थ कार्यालयों के पदाधिकारियों और कर्मचारियों को भी इन निर्देशों से अवगत कराया जाए और इसका दृढ़ता से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
यानी जिलों और विभागों के अधीन आने वाले कार्यालयों में भी सांसदों और विधायकों के फोन, पत्राचार और मुलाकात के दौरान तय प्रोटोकॉल का पालन करना होगा।







