जदयू के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता नीरज कुमार और प्रदेश प्रवक्ता पूजा पैट्रिक ने प्रेस वार्ता कर लालू प्रसाद पर फरक्का जल समझौते के मुद्दे पर बिहार के हितों से समझौता करने का आरोप लगाया। कहा कि चारा घोटाले में जेल जाने के डर से लालू प्रसाद ने फरक्का जल समझौते पर बिहार के हितों की बलि चढ़ा दी। 12 दिसंबर 1996 को भारत और बांग्लादेश के बीच हुई इस जल संधि के दौरान लालू केंद्र की संयुक्त मोर्चा सरकार में थे और बिहार के मुख्यमंत्री भी थे।
तत्कालीन विदेश मंत्री आईके गुजराल से अच्छे संबंध होने के बावजूद उन्होंने इस संधि के विरोध में कोई आवाज नहीं उठाई। जदयू ने सवाल उठाया कि जब सत्ता का सुख मिल रहा था, तब उन्होंने चुप्पी साधे रखी और सत्ता से बाहर होने के बाद 2011 में विरोध का नाटक किया। कहा कि नीतीश कुमार ने हमेशा इस संधि के प्रावधानों का विरोध किया है और गंगा नदी में जमा हो रही गाद का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर उठाया है।
प्रवक्ताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और उप मुख्यमंत्री विजय चौधरी ने केंद्रीय वित्त मंत्री व विदेश मंत्री से मिलकर बिहार की चिंताएं रखीं। मालूम हो कि शनिवार को लालू प्रसाद ने फरक्का संधि को लेकर जदयू को घेरा था।
जदयू ने राजद से 5 सवाल पूछे
जब जदयू सांसद संजय झा ने राज्यसभा में फरक्का जल समझौते पर सवाल उठाया, तो राजद सांसद क्यों खामोश रहे? 1996 में सत्ता और प्रभाव दोनों रहते हुए भी लालू प्रसाद ने संधि पर आपत्ति क्यों दर्ज नहीं कराई? 2004 में केंद्र में मजबूत स्थिति में होने के बावजूद समस्या समाधान के लिए आवाज क्यों नहीं उठाई गई? क्या चारा घोटाले में जेल जाने के भय के कारण बिहार के हितों से समझौता किया गया? 2011 में सत्ता से बाहर होने के बाद ही बिहार के हितों की याद क्यों आई?







