चुनावी वादों को चुनाव घोषणा पत्र से जमीन पर उतारना पड़ता है………………….
लोकतंत्र की आत्मा केवल मतदान में नहीं, बल्कि जनता से किए गए वायदों को पूरा करने में भी बसती है. राजनीतिक प्रतिबद्धता वही नैतिक अनुबंध है, जो चुनावी घोषणा-पत्रों और शासन की वास्तविकताओं के मध्य सेतु का काम करता है. जब यह सेतु कमजोर पड़ता है, तब जनमत और सत्ता के बीच अविश्वास की खाई […]